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मनुष्य की वागिन्द्रिय द्वारा व्यक्त भाषा की सबसे छोटी पहचानी जा सकने वाली इकाई ध्वनि है. हिन्दी व्याकरण में इस ध्वनि के लिखित रूप को वर्ण कहा जाता है. वर्ण को इसीलिए ध्वनि-चिह्न भी कहते हैं. ध्वनि-भेद नहीं होने पर भी वर्ण-भेद हो सकता है. ऐसा दो भाषाओं के ध्वनि-चिह्नों में अन्तर के कारण होता है. जैसे, अंग्रेजी का "inch" और हिन्दी का "इंच".
उच्चारण के दो मुख्य घटक हैं - स्वर और व्यंजन. वर्णों का निर्माण इन्हीं दो घटकों से होता है.
वर्ण हिन्दी के मौखिक और लिखित दोनों रूपों को व्यक्त करते हैं. हिन्दी वर्णों की लिपि (लिखे जाने वाले चिह्न) को 'देवनागरी' लिपि कहते हैं.
जिन वर्णों का उच्चारण बिना अवरोध अथवा विघ्न-बाधा के होता है, उन वर्णों को स्वर कहते हैं. ये स्वतंत्र होते हैं. इनके उच्चारण में किसी दूसरे वर्ण की सहायता नहीं ली जाती है.
जबकि व्यंजन वे वर्ण हैं जिनका उच्चारण स्वर के बिना नहीं हो सकता.