CBSE Segment

A lot of experiments have been done in teaching techniques. Class-room teaching has been augmented by various types of additional activities (for individuals and for groups of students). But, we still find (CBSE) students taking help from teachers/tutors and coaching schools beyond regular school hours.

CBSE segment is an experiment to try out e-learning at school level. It is not limited to CBSE though. We chose to mention CBSE only to emphasize that for content and tests we'd stay close to the CBSE curriculum.

In this segment, we are trying to find out -

हिंदी

इस खंड में हम हिंदी की पाठ्यपुस्तकों से सम्बंधित सामग्री रखेंगे. हिंदी में टाइप करने के लिए आप 0sEd का प्रयोग कर सकते हैं. ध्यान रहे कि HTML एडिटर में आप केवल यूनिकोड में टाइप किये गए टेक्स्ट को ही कॉपी-पेस्ट कर सकते हैं.

यहाँ संकलित सामग्री सामान्य प्रयोग के आलावा वर्चुअल कैम्पस 0sILE में दिए जानेवाले कोर्स में भी किया जा सकता है. संकलित सामग्री पाठ्यक्रम के अनुरूप होनी चाहिए.

कृपया विद्यार्थियों के लिए उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए सामग्री का संकलन करें.

अधिकतर पृष्ठ अपूर्ण हो सकते हैं. अवसर मिलने पर भाग लेने वाले लेखक योगदान करेंगे और यहाँ संकलित सामग्री लगातार बढ़ेगी ऐसी अपेक्षा है.

हिंदी व्याकरण

CBSE पाठ्यक्रम के अनुसार, विद्यार्थियों को व्याकरण के निम्नलिखित बिन्दुओं से परिचित होना चाहिए -
कोई पाठ्यपुस्तक प्रस्तावित नहीं लगती. विद्यार्थी सुविधानुसार किसी भी पाठ्यपुस्तक का प्रयोग कर सकते हैं. यहाँ संकलित सामग्री विद्यार्थियों के आलावा अन्य जिज्ञासुओं के लिए भी उपयोगी होगी.

भाषा

भाषा

हाथ, झंडी, बत्ती आदि से किए गए संकेतों, या सीटी के मध्यम से किए गए संकेतों से अलग, मानव मुख से निकले ध्वनि-संकेत (भावों या विचारों की) अभिव्यक्ति का मुख्य मध्यम हैं.

भाषा इन ध्वनि संकेतों की एक व्यवस्था है. यह व्यवस्था ध्वनियों के उच्चारण, शब्दों एवं पदों की रचना तथा वाक्यों की रचना में मिलती है. (उदाहरण - हिन्दी में ध्वनि विषयक व्यवस्था के अनुसार 'प्क', 'प्त' जैसे व्यंजन समूह से शब्द का आरम्भ नहीं होता है, जबकि 'प्य', 'प्र' ['प्यासा', 'प्रेम'] से हो सकता है.)

भाषा की अभिव्यक्ति के दो रूप हैं - मौखिक और लिखित. मौखिक रूप व्यक्ति के जीवन और समाज के विकास क्रम मैं पहले आता है और लिखित रूप बाद में आता है. मौखिक रूप हमें प्राकृतिक रूप से सहज ही प्राप्त हुआ लगता है, जबकि लिखित रूप को सीखने में विशेष प्रयत्न की आवश्यकता पड़ती है. लेखन क्रिया केवल एक युक्ति है, जिससे भाषा का उच्चरित रूप दृश्य संकेतों के प्रतीक-चिह्नों द्वारा अंकित किया जाता है.

ध्वनियों को अंकित करने के लिए निश्चित किए गए चिह्नों की व्यवस्था को लिपि कहते हैं. हिन्दी भाषा की चिह्न व्यवस्था को 'देवनागरी' लिपि कहते हैं. 'देवनागरी' लिपि-चिह्नों का ज्ञान ही हिन्दी का अक्षर-ज्ञान है.

भाषा के मौखिक और लिखित रूप की सुनिश्चित व्यवस्था इसके व्यवहार में नियमितता और मानकता लाती है. व्याकरण भाषा के नियमों का संकलन और विश्लेषण करता है. शैक्षिक व्याकरण इन नियमों को स्थिर करता है और भाषा को परिनिष्ठित बनाने में सहायक होता है. व्याकरण भाषा के नियम नहीं बनाता, बल्कि वह प्रचलित भाषा-प्रयोग को आधार मानकर उसका विश्लेषण करता है, समाज द्वारा सिद्ध प्रयोग का अनुसरण करता हुआ भाषा के स्वीकार्य एवं अस्वीकार्य रूपों में भेद करने में सहायता करता है.

व्याकरण में भाषा का विश्लेषण कई स्तरों पर किया जाता है -

  • ध्वनि तथा उच्चारण के स्तर पर,
  • लिपि तथा वर्तनी के स्तर पर,
  • शब्द के स्तर पर,
  • पद के स्तर पर,
  • वाक्य-रचना के स्तर पर,
  • अर्थ के स्तर पर.

वर्ण विचार

वर्ण विचार

मनुष्य की वागिन्द्रिय द्वारा व्यक्त भाषा की सबसे छोटी पहचानी जा सकने वाली इकाई ध्वनि है. हिन्दी व्याकरण में इस ध्वनि के लिखित रूप को वर्ण कहा जाता है. वर्ण को इसीलिए ध्वनि-चिह्न भी कहते हैं. ध्वनि-भेद नहीं होने पर भी वर्ण-भेद हो सकता है. ऐसा दो भाषाओं के ध्वनि-चिह्नों में अन्तर के कारण होता है. जैसे, अंग्रेजी का "inch" और हिन्दी का "इंच".

उच्चारण के दो मुख्य घटक हैं - स्वर और व्यंजन. वर्णों का निर्माण इन्हीं दो घटकों से होता है.

वर्ण हिन्दी के मौखिक और लिखित दोनों रूपों को व्यक्त करते हैं. हिन्दी वर्णों की लिपि (लिखे जाने वाले चिह्न) को 'देवनागरी' लिपि कहते हैं.

जिन वर्णों का उच्चारण बिना अवरोध अथवा विघ्न-बाधा के होता है, उन वर्णों को स्वर कहते हैं. ये स्वतंत्र होते हैं. इनके उच्चारण में किसी दूसरे वर्ण की सहायता नहीं ली जाती है.

जबकि व्यंजन वे वर्ण हैं जिनका उच्चारण स्वर के बिना नहीं हो सकता.

स्वरवर्ण

स्वर ग्यारह (११) हैं. स्वरों के उच्चारण में सामान्यतः कंठ या तालू का प्रयोग होता है, जीभ या होठ का नहीं. (अपवाद - 'उ' और 'ऊ' के उच्चारण में होठों का प्रयोग होता है.)

उच्चारण के कालमान को 'मात्रा' कहते हैं.

कालमान के अनुसार स्वरों के दो प्रकार हैं:

  • ह्रस्व स्वर: अ, इ, उ, ऋ.
    • इन मूल स्वरों की उत्पत्ति दूसरे स्वरों से नहीं होती. इनके उच्चारण में काल की एक मात्र लगती है.
    • ह्रस्व ऋ का प्रयोग हिन्दी या अन्य भारतीय भाषाओँ में नगण्य है. ऋ का प्रयोग केवल संस्कृत से आये (तत्सम) शब्दों में होता है, जैसे, ऋषि, ऋतु, ऋग्वेद, ऋण, ऋतंभरा कृषि आदि.
    • ऋ में व्यंजन और स्वर का योग है. उच्चारण की दृष्टि से यह स्वर नहीं है. इसका उच्चारण हिंदी में 'रि' के रूप में होता है. लेखन की दृष्टि से ऋ स्वर है, क्योंकि उसका मात्रा चिह्न है.
  • दीर्घ स्वर: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ.
    • आ, ई, ऊ मूल ह्रस्व स्वर को उसी के साथ मिलाने से बनते हैं. जैसे - 'अ' + 'अ' = 'आ', 'इ' + 'इ' = 'ई', 'उ' + 'उ' = 'ऊ'. इनके उच्चारण में काल की दो मात्राएँ लगती हैं.
    • ए, ऐ, ओ, औ संयुक्त स्वर हैं.
    • ये स्वर मात्र ह्रस्व स्वरों के दीर्घ रूप नहीं हैं. ये स्वतंत्र ध्वनियाँ हैं.
  • प्लुत: इसके उच्चारण में काल की ३ मात्राएँ लगती हैं. इसका कोई चिह्न नहीं होता. इसके लिए तीन का अंक (३) लगाया जाता है. जैसे - ओ३म. हिंदी में प्लुत का प्रयोग नहीं होता है.
कुछ लोग 'लृ' को भी मूल स्वरों में गिनते हैं. लेकिन हिन्दी में इसका प्रयोग नहीं होता है.

संयुक्त स्वर

दीर्घ स्वरों में से ए, ऐ, ओ, औ संयुक्त स्वर हैं.

भैया = भइया
नैया = नइया 
कौवा = कउवा
हौवा = हउवा

स्वरों के भेद

जाति के अनुसार स्वरों के दो भेद हैं:

Physics

This section is for CBSE Physics textbook related stuff as well as for general articles useful for school students.

The obvious guidelines are that the content:

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Time-saving summary from Irodov's book "Problems in General Physics"

The "time-saving summary of the principal formulas for the relevant area of physics" are being presented here for convenience.

I hope that users will find 0sNotes very useful in making notes with explanation, examples and problems.

Kinematics

 

The Fundamental Equation of Dynamics

Laws of Conservation of Energy, Momentum, and Angular Momentum

Work and power of the force $\vec{F}$: $$W = \int \vec{F}.d\vec{r} = \int F_s ds, P = \vec{F}.\vec{v}$$

Increment of the kinetic energy of a particle: $$T_2 - T_1 = W,$$ where $W$ is the work performed by the resultant of all the forces acting on the particle.

 

Universal Gravitation

Dynamics of a Solid Body

Elastic Deformations of a Solid Body

 

Hydrodynamics

 

Relativistic Mechanics



* The reference frame $!K^\prime$ is assumed to move with a velocity $V$ in the positive direction of the $x$ axis of the frame $K$, with the $!x^\prime$ and $x$ axes coinciding and the $!y^\prime$ and $y$ axes parallel.

Equation of the Gas State. Processes

Ideal gas law: $$pV = \frac{m}{M}RT,$$ where $M$ is the molar mass.

Barometric formula: $$ p = p_0 e^{-Mgh/RT},$$ where $p_0$ is the pressure at the height $h = 0$.

Van der Waals equation of the gas state (for a mole): $$\left(p+\frac{a}{V_M^2}\right) \left(V_M - b\right) = RT,$$ where $V_M$ is the molar volume under given $p$ and $T$.

 

The First Law of Thermodynamics. Heat Capacity

Kinetic Theory of Gases. Boltzmann's Law and Maxwell's Distribution

 

The Second Law of Thermodynamics. Entropy

Liquids. Capillary Effects

  • Additional (capillary) pressure in a liquid under an arbitrary surface (Laplace's forumla): $$\Delta p = \alpha \left(\frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2}\right),$$ where $\alpha$ is the surface tension of a given liquid.
  • Free energy increment of the surface layer of a liquid: $$dF = \alpha dS,$$ where $dS$ is the area increment of the surface layer.
  • Amount of heat required to form a unit area of the liquid surface layer during the isothermal increase of its surface: $$ q = -T \frac{d\alpha}{dT}.$$

 

Phase Transformations

Transport Phenomena